भलो भयो विधि ना दिए शेषनाग के कान, धरा मेरू सब डोलते तानसेन की तान ! पढ़िए ध्रुव गुप्त का यह आर्टिकल-

संगीत सम्राट तानसेन भारतीय शास्त्रीय संगीत के शिखर पुरुषों में एक रहे हैं। ग्वालियर के हजरत मुहम्मद गौस और वृंदावन के स्वामी हरिदास के शिष्य तानसेन सम्राट अकबर के दरबारी गायक और उनके नवरत्नों में से एक थे उनकी गायन प्रतिभा के बारे में ‘आईने अकबरी’ में इतिहासकार अबुल फज़ल ने कहा है – ‘पिछले एक हज़ार सालों में उनके जैसा गायक नहीं हुआ।’ उनके गहरे मित्र और भक्त कवि सूरदास ने उनके बारे में लिखा है – भलो…

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देशभर में सराही जा रहीं डॉ कविता भट्ट की कृतियां, पाठक दे रहे ऐसी प्रतिक्रियाएं-

नई दिल्ली | कोरोना लॉकडाउन में छात्रों ने साहित्य और रचनाओं के क्षेत्र में काफी रूचि दिखाई है | प्रत्येक उम्र के लोगों ने विभिन्न लेखकों, कवयित्रियों और साहित्यकारों को जमकर सराहा है | उत्तराखंड की लेखिका/ कवयित्री डॉ कविता भट्ट की कई कृतियों की सराहना देशभर में हो रही है | योग मंजूषा और योग साधना व योग एक महान भारतीय विरासत विभिन्न उम्र के पाठकों द्वारा काफी सराही जा रही हैं | डॉ कविता को पाठकों की…

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पढ़िए डॉ सुनील दत्त का यह आर्टिकल- ‘उत्तराखण्ड देवभूमि से साहित्य की सशक्त हस्ताक्षर डॉ कविता भट्ट’

देहरादून | उत्तराखण्ड की देवभूमि से निकल पूरे देश में साहित्य रचनाओं और कविताओं के माध्यम से पहचान बनाने वाली कवयित्री डॉ कविता भट्ट की चर्चाएं देवभूमि में लोगों की जुबां पर हैं | ऋषिकेश स्थित भरत मंदिर इंटर कालेज के प्रवक्ता डॉ सुनील दत्त थपलियाल ने डॉ कविता भट्ट की शख्सियत को अपने शब्दों में बया किया है | पढ़िए डॉ सुनील का यह आर्टिकल- कुलं पवित्रं जननी कृतार्थावसुन्धरा पुण्यवती च येन।जिस कुल में वे महापुरुष अवतरित होते…

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पढ़िए MP की उभरती कवयित्री अंकिता जैन ‘अवनी’ की दिल को छू लेने वाली ये चर्चित रचनाएं-

‘विदेश में’पटर-पटर अंग्रेजी बोलते लोगों में,जब कोई हिंदी भाषी मिल जाए,और हैलो, हाय के बीच में,नमस्ते सुनाई दे जाए,तो यूं लगेगा,कि हम पहुँच गये स्वदेश में,या देश आ गया विदेश में।जब विदेशी नदी को देख,माँ गंगा का स्मरण हो जाए,और माँ की स्तुति गाने को,मन श्रद्धा से भर जाये।तो ऐसा लगेगा,जैसे हम पहुँच गये वहाँ,मां के एक आदेश में,या माँ आ गई हो विदेश में।जब विदेशी खामोशी में,कोई देशी त्यौहार का शोरगुलयाद दिला दे,तो ऐसा लगेगा जैसे,अपने ही हों…

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महाकवि दिनकर की पुण्यतिथि पर पढ़िए ध्रुप गुप्त का आर्टिकल- अपने समय का सूर्य हूं मैं !

रामधारी सिंह दिनकर हिंदी के उन गिनेचुने कवियों में एक थे जिनकी कविताओ में एक ओर ओज, विद्रोह, आक्रोश और क्रान्ति का तेज है तो दूसरी ओर कोमल श्रृंगारिक भावनाओं और प्रेम की इतनी कोमल अभिव्यक्ति जिसकी बारीकी पढ़ने वालों को स्तब्ध करती है। उनका ‘कुरुक्षेत्र’ श्रेष्ठ ओजपूर्ण काव्यों में और ‘उर्वशी’ श्रेष्ठ श्रृंगारिक काव्यों में शुमार होते हैं। दोनों काव्य रचनाएं उनके व्यक्तित्व के दो ऐसे ध्रुव है जिनके अंतर्संघर्ष की बुनियाद पर उनका विराट काव्य-संसार खड़ा है।…

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इंदौर में मिले कोरोना के 5 नए मरीज, भारत मे अबतक 11 मौत

नई दिल्ली । वैश्विक महामारी कोरोना से निपटने के लिए पूरे देश में 14 अप्रैल तक पूर्ण लॉकडाउन की घोषणा की गई है। अभी तक भारत में कोरोना वायरस के मामलों की संख्या 542 हो गई है। बुधवार को बिहार में एक और मध्यप्रदेश में पांच नए मरीज मिले हैं। तमिलनाडु में एक व्यक्ति की मौत के साथ देश में कुल मृतकों की संख्या 11 हो गई है। इंदौर में मिले पांच मरीज-इंदौर के अलग-अलग अस्पतालों में भर्ती पांच…

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फणीश्वरनाथ रेणु पर पढ़िए ध्रुव गुप्त का यह आर्टिकल : मिट्टी का संगीतकार !

हिन्दी के कालजयी कथाकार स्वर्गीय फणीश्वर नाथ रेणु को पहला आंचलिक कथाकार माना जाता है। हिंदी कहानी में देशज समाज की स्थापना का श्रेय उन्हें प्राप्त है। उनके दो उपन्यासों – ‘मैला आंचल’, ‘परती परिकथा’ और उनकी दर्जनों कहानियों के पात्रों की जीवंतता, सरलता, निश्छलता और सहज अनुराग हिंदी कथा साहित्य में संभवतः पहली बार घटित हुआ था। हिंदी कहानी में पहली बार लगा कि शब्दों से सिनेमा की तरह दृश्यों को जीवंत भी किया जा सकता है। रेणु…

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बागपत के छपरौली की शिक्षिका विनीता को मिला ‘बेस्ट काव्य गायन’ अवार्ड, बेसिक शिक्षा निदेशक ने किया सम्मानित

छपरौली । उत्तर प्रदेश राजधानी लखनऊ मे आयोजित राज्य स्तरीय काव्य गायन प्रतियोगिता मे जनपद के छपरौली ब्लॉक की होनहार अध्यापिका विनिता तोमर स. अ. प्राथमिक विधालय न. 3 के चयनित होने पर राज्य बेसिक शिक्षा परिषद के निदेशक व अध्यक्ष बेसिक शिक्षा डा. सर्वेन्द्र बिक्रम सिंह ने राज्य स्तरीय पुरस्कार “बेस्ट काव्य गायन ” अवार्ड व प्रशिस्त पत्र देकर सम्मानित किया । जिससे अध्यापकों ने खुशी का इजहार किया है । बागपत जिले के बेसिक प्राथमिक विधालय न….

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गुरुदेव रवीन्द्रनाथ टैगोर के बारे में यह नहीं जानते होंगे आप, पढ़िए-

साहित्य, संगीत, रंगमंच और चित्रकला सहित विभिन्न कलाओं में महारत रखने वाले गुरुदेव रवीन्द्रनाथ टैगोर मूलतः प्रकृति प्रेमी थे और वह देश विदेश चाहे जहां कहीं रहें, वर्षा के आगमन पर हमेशा शांतिनिकेतन में रहना पसंद करते थे। रवीन्द्रनाथ अपने जीवन के उत्तरार्ध में लंदन और यूरोप की यात्रा पर गए थे। इसी दौरान वर्षाकाल आने पर उनका मन शांतिनिकेतन के माहौल के लिए तरसने लगा। उन्होंने अपने एक नजदीकी से कहा था कि वह शांतिनिकेतन में रहकर ही…

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रवीश को रमन मैग्सेसे सम्मान पत्रकारिता की जनपक्षधरता और उच्चतम मानवीय मूल्यों का सम्मान है !

पत्रकारिता की दुनिया के कई बड़े सम्मानों के बाद रवीश कुमार को प्रतिष्ठित अंतर्राष्ट्रीय रमन मैग्सेसे सम्मान वस्तुतः पत्रकारिता की जनपक्षधरता और उच्चतम मानवीय मूल्यों का सम्मान है। रीढ़विहीन, बिकी हुई और बहुत हद तक वीभत्स पत्रकारिता के इस दौर में रवीश कुमार उन गिनती के पत्रकारों में एक हैं जो तमाम धमकियों और प्रलोभनों के बावजूद सत्ता प्रतिष्ठानों के आगे झुकने की जगह सत्ता की निरंकुशता, सांप्रदायिकता और छल को बेनक़ाब करते रहे। हिंदी मीडिया चैनलों की बेशर्म…

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