पढ़िए रक्षाबंधन के यह पौराणिक और ऐतिहासिक मायने-

मिठाइयाँ, ठिठोलियाँ, नोक-झोंक और असीम प्यार से भरा राखी का त्योहार सदियों से मनता आ रहा है। मुझे इस बात का अचम्भा होता है जब आजकल इस तरह की बातें कही जाती हैं कि यह पर्व भारतीय समाज की पैतृक व्यवस्था का प्रतीक है! जब तक हम अपने ही त्योहारों और मान्यताओं को बिना समझे यूं ही मनाते जाएंगे, तब तक इन पर न केवल अनगिनत सवाल उठेंगे, बल्कि उनके प्रति हमारे विचार और हमारी श्रद्धा दोनों डगमगाएंगे। रक्षाबंधन…

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अमजद खान की पुण्यतिथि पर पढ़िए ध्रुव गुप्त का आर्टिकल- एक था गब्बर !

ध्रुव गुप्त- कोई अभिनेता किसी एक फिल्म से भी अमरत्व हासिल कर सकता है, हिंदी सिनेमा में इसका सबसे बड़ा उदाहरण मरहूम अभिनेता अमजद खान हैं। वैसे तो अमजद ने दर्जनों फिल्मों में खलनायक, सहनायक, चरित्र अभिनेता की विविध भूमिकाएं की, लेकिन याद उन्हें उनकी पहली फिल्म ‘शोले’ में गब्बर सिंह की भूमिका के लिए ही किया जाता है। हिंदी सिनेमा के दर्शकों ने किसी डाकू का इतना खूंखार, भयावह और नृशंस चरित्र न पहले देखा था और न…

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नफ़रत की ज़िद में प्यार से आगे निकल गए, पढ़िए आयशा अयूब की दिल को छू जाने वाली ये गजलें-

लखनऊ | कोरोना लॉकडाउन के बीच साहित्यकारों और शायरों को सोशल मीडिया पर जमकर सराहा गया है | लखनऊ की प्रख्यात शायरा और समाजसेविका आयशा अयूब की गजलें सोशल मीडिया पर वायरल हो रही हैं | मुखातिब फाउंडेशन चलाने वाली आयशा की गजलों को लोग खूब असंद कर रहे हैं | आप भी पढ़िए उनकी ये गजलें- पाबंदी ए हिसार से आगे निकल गएनफ़रत की ज़िद में प्यार से आगे निकल गए इस दर्जा इख़्तियार उसे ख़ुद पे दे…

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पढ़िए गोपालदास नीरज की पुण्यतिथि पर ध्रुव गुप्त का आर्टिकल- ऐ भाई, ज़रा देख के चलो !

स्व. गोपाल दास नीरज जी को उनके छंदबद्ध गीतों के लिए ही जाना जाता है, लेकिन विचित्र तथ्य यह भी है कि हिंदी सिनेमा में छंदमुक्त गीतों के प्रवर्तक भी वही थे। वह पहला छंदमुक्त गीत था राज कपूर की फिल्म ‘मेरा नाम जोकर’ का। राज जी को सर्कस के विदूषक की अपनी भूमिका में गाने के लिए कोई एक गीत चाहिए था जिसमें रफ़्तार भी हो, उदासी भी और जीवन-दर्शन भी। गीत की रचना के लिए बैठक जमी…

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भलो भयो विधि ना दिए शेषनाग के कान, धरा मेरू सब डोलते तानसेन की तान ! पढ़िए ध्रुव गुप्त का यह आर्टिकल-

संगीत सम्राट तानसेन भारतीय शास्त्रीय संगीत के शिखर पुरुषों में एक रहे हैं। ग्वालियर के हजरत मुहम्मद गौस और वृंदावन के स्वामी हरिदास के शिष्य तानसेन सम्राट अकबर के दरबारी गायक और उनके नवरत्नों में से एक थे उनकी गायन प्रतिभा के बारे में ‘आईने अकबरी’ में इतिहासकार अबुल फज़ल ने कहा है – ‘पिछले एक हज़ार सालों में उनके जैसा गायक नहीं हुआ।’ उनके गहरे मित्र और भक्त कवि सूरदास ने उनके बारे में लिखा है – भलो…

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देशभर में सराही जा रहीं डॉ कविता भट्ट की कृतियां, पाठक दे रहे ऐसी प्रतिक्रियाएं-

नई दिल्ली | कोरोना लॉकडाउन में छात्रों ने साहित्य और रचनाओं के क्षेत्र में काफी रूचि दिखाई है | प्रत्येक उम्र के लोगों ने विभिन्न लेखकों, कवयित्रियों और साहित्यकारों को जमकर सराहा है | उत्तराखंड की लेखिका/ कवयित्री डॉ कविता भट्ट की कई कृतियों की सराहना देशभर में हो रही है | योग मंजूषा और योग साधना व योग एक महान भारतीय विरासत विभिन्न उम्र के पाठकों द्वारा काफी सराही जा रही हैं | डॉ कविता को पाठकों की…

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पढ़िए डॉ सुनील दत्त का यह आर्टिकल- ‘उत्तराखण्ड देवभूमि से साहित्य की सशक्त हस्ताक्षर डॉ कविता भट्ट’

देहरादून | उत्तराखण्ड की देवभूमि से निकल पूरे देश में साहित्य रचनाओं और कविताओं के माध्यम से पहचान बनाने वाली कवयित्री डॉ कविता भट्ट की चर्चाएं देवभूमि में लोगों की जुबां पर हैं | ऋषिकेश स्थित भरत मंदिर इंटर कालेज के प्रवक्ता डॉ सुनील दत्त थपलियाल ने डॉ कविता भट्ट की शख्सियत को अपने शब्दों में बया किया है | पढ़िए डॉ सुनील का यह आर्टिकल- कुलं पवित्रं जननी कृतार्थावसुन्धरा पुण्यवती च येन।जिस कुल में वे महापुरुष अवतरित होते…

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पढ़िए MP की उभरती कवयित्री अंकिता जैन ‘अवनी’ की दिल को छू लेने वाली ये चर्चित रचनाएं-

‘विदेश में’पटर-पटर अंग्रेजी बोलते लोगों में,जब कोई हिंदी भाषी मिल जाए,और हैलो, हाय के बीच में,नमस्ते सुनाई दे जाए,तो यूं लगेगा,कि हम पहुँच गये स्वदेश में,या देश आ गया विदेश में।जब विदेशी नदी को देख,माँ गंगा का स्मरण हो जाए,और माँ की स्तुति गाने को,मन श्रद्धा से भर जाये।तो ऐसा लगेगा,जैसे हम पहुँच गये वहाँ,मां के एक आदेश में,या माँ आ गई हो विदेश में।जब विदेशी खामोशी में,कोई देशी त्यौहार का शोरगुलयाद दिला दे,तो ऐसा लगेगा जैसे,अपने ही हों…

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महाकवि दिनकर की पुण्यतिथि पर पढ़िए ध्रुप गुप्त का आर्टिकल- अपने समय का सूर्य हूं मैं !

रामधारी सिंह दिनकर हिंदी के उन गिनेचुने कवियों में एक थे जिनकी कविताओ में एक ओर ओज, विद्रोह, आक्रोश और क्रान्ति का तेज है तो दूसरी ओर कोमल श्रृंगारिक भावनाओं और प्रेम की इतनी कोमल अभिव्यक्ति जिसकी बारीकी पढ़ने वालों को स्तब्ध करती है। उनका ‘कुरुक्षेत्र’ श्रेष्ठ ओजपूर्ण काव्यों में और ‘उर्वशी’ श्रेष्ठ श्रृंगारिक काव्यों में शुमार होते हैं। दोनों काव्य रचनाएं उनके व्यक्तित्व के दो ऐसे ध्रुव है जिनके अंतर्संघर्ष की बुनियाद पर उनका विराट काव्य-संसार खड़ा है।…

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इंदौर में मिले कोरोना के 5 नए मरीज, भारत मे अबतक 11 मौत

नई दिल्ली । वैश्विक महामारी कोरोना से निपटने के लिए पूरे देश में 14 अप्रैल तक पूर्ण लॉकडाउन की घोषणा की गई है। अभी तक भारत में कोरोना वायरस के मामलों की संख्या 542 हो गई है। बुधवार को बिहार में एक और मध्यप्रदेश में पांच नए मरीज मिले हैं। तमिलनाडु में एक व्यक्ति की मौत के साथ देश में कुल मृतकों की संख्या 11 हो गई है। इंदौर में मिले पांच मरीज-इंदौर के अलग-अलग अस्पतालों में भर्ती पांच…

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