BSP सुप्रीमो मायावती ने BJP के उड़ाए होश, ‘मोदी-अमित’ शाह को बताया ‘गुरु-चेला’, गेस्ट हाउस कांड को भूल देशहित में किया SP से गठबंधन

लखनऊ । देश की जिस खबर का इंतजार था वह आ ही गयी । भाजपा और कांग्रेस को झटका देते हुए बहुजन समाज पार्टी की मुखिया मायावती ने होटल ताज में आज समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव के साथ संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित किया। मायावती ने इस कॉन्फ्रेंस की शुरुआत में ही इसको प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी व भाजपा अध्यक्ष अमित शाह की नींद उड़ाने वाला बताया। समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश ने कहा कि उत्तर प्रदेश में माहौल बेहद भयावह है।

अखिलेश यादव और मायावती दोनों ने साथ आने के संकेत काफी पहले से देना शुरू कर दिया था। इस जोड़ी का फॉर्मूला उत्तर प्रदेश में लोकसभा के उप चुनाव में चल निकला। लोकसभा चुनाव में डंका बजाने वाली भारतीय जनता पार्टी ने उप चुनाव में अपनी सभी सीट गंवा दी। सबसे बड़ा झटका को इनको गोरखपुर में लगा। सीएम योगी आदित्यनाथ के गढ़ में भाजपा ने सीट गंवा दी। फूलपुर में आजादी के बाद से पहली बार भाजपा का खाता खुला था, लेकिन पार्टी इसको बरकरार नहीं रख सकी। कैराना लोकसभा के साथ बिजनौर में नूरपुर विधानसभा उप चुनाव भी भाजपा ने गंवा दिया।

मायावती ने कहा यह प्रेस कॉन्फ्रेंस से मोदी-शाह जो कि गुरु चेले हैं की नींद उड़ाने वाली है। उन्होंने कहा कि हमने 1995 के गेस्ट हाउस कांड कांड को जनहित में देश ऊपर रखते हुए गठबंधन का फैसला लिया। भाजपा ने लोकसभा व विधानसभा में बेईमानी से सरकार बनाई थी। इसके बाद तो हमने उपचुनावों में भाजपा को हराकर इनको रोकने की शुरुआत कर दी थी। इस चुनाव में तो कांग्रेस के उम्मीदवार की तो जमानत जब्त हो गई थी। इसके बाद चर्चा शुरू हुई कि सपा व बसपा साथ आ जाएं तो भाजपा को सत्ता में आने से रोका जा सकता है। दलितों, पिछड़ों, गरीबों, धार्मिक अल्पसंख्यक के हितों की उपेक्षा को देखते हुए गेस्ट हाउस कांड को किनारे करते हुए हमने गठबंधन का फैसला किया।

मायावती ने कहा कि कांग्रेस के राज में घोषित इमरजेंसी थी और अब तो देश में अघोषित इमरजेंसी है। मोदी एंड कंपनी सरकारी मशीनरी का दुरूपयोग कर प्रभावी विरोधियों के खिलाफ गड़े मुकदमे उखाड़ कर उनको परेशान कर रहे हैं। कांग्रेस के साथ सपा-बसपा गठबंधन का कोई खास फायदा नहीं होता। हमारा वोट तो ट्रासंफर हो जाता है लेकिन कांग्रेस का वोट ट्रांसफर नहीं होता या अंदरूनी रणनीति के तहत कहीं और करा दिया जाता है। इसमें हमारी जैसी ईमानदार पार्टी का वोट घट जाता है। 96 में हमारे लिए कड़वा अनुभव था। 1993 में सपा बसपा का वोट ईमानदारी से ट्रांसफर हुआ था इसलिये गठबंधन कोई हर्ज नहीं है।

अगर भाजपा ने पूर्व की तरह ईवीएम में गड़बड़ी नहीं की और राम मंदिर जैसे मुद्दों से धार्मिक भावनाओं को नहीं भड़काया तो भाजपा एंड कंपनी को हम जरूर सत्ता में आने से रोकेंगे। उन्होंने कहा कि हम दोनों 38-38 सीट पर लड़ेंगे। दो सीट अमेठी और रायबरेली कांग्रेस के लिये छोड़ी हैं। 2 सीट और कुछ अन्य पार्टी के लिये छोड़ी है। उन्होंने कहा कि हाल में भाजपा की अखिलेश यादव के खिलाफ सीबीआई जांच की साजिश से हमारा गठबंधन और मजबूत हुआ है। भाजपा का शिवपाल एंड कंपनी पर पैसा बहाना भी काम नहीं आएगा। सभी वर्ग के लोग हमारे साथ आकर भाजपा को हराएंगे।