..तो छात्र राजनीति पर प्रतिबंध लगा देना चाहिए, जरूर पढ़िए छात्र नेताओं को आईना दिखाता गौरव पांडेय का यह आर्टिकल-

छात्र राजनीति में एक नारा प्रयोग किया जाता है ‘लड़ो पढ़ाई करने को, पढ़ो समाज बदलने को’ लेकिन अब ये कुछ ऐसा हो गया है ‘पढ़ो राजनीति में घुसने को, राजनीति करो अपनी आर्थिक हालत बदलने को’। जिस देश में छात्र नेता से राजनेता बने लोगों ने देश के विकास को नए आयाम दिए, जहां छात्र राजनीति को इस मकसद के साथ प्रयोग किया जाता हो कि वहां से कुछ पढ़े-लिखे लोग आएंगे जो सच में जनता के लिए काम करेंगे, जो राजनीति शब्द के चेहरे पर पुती कालिख को मिटाने की कोशिश करेंगे, लेकिन पता क्या चलता है कि जिनसे उम्मीद रखी जा रही है वो निकले ही कोयले की खान से हैं।

अलीगढ़ की छात्र राजनीति पूरे प्रदेश में एक अलग स्थान रखती है और यहां देश का आगामी नेता देश के साथ मौज ले रहा होता है। अगर ऐसा ही हाल हर जगह की छात्र राजनीति का है तो कायदे से छात्र राजनीति पर प्रतिबंध लगा देना चाहिए। जहर किसी अंग में फैल रहा हो तो उस अंग को जहां से संभव हो वहां से काट देना चाहिए। और ये हाल सिर्फ इनका नहीं है, हमाम में सब नंगे हैं। चार साल अलीगढ़ में रहने और करीब एक साल पत्रकारिता करने के दौरान वहां की छात्र राजनीति को खूब समझा है।

ऐसे लोग जिन्ना की फ़ोटो से आहत होते हैं, इन्होंने राम लला से वादा किया है कि ये आएंगे और मंदिर वहीं बनाएंगे… लेकिन राम लला जानते हैं कि ये नहीं आएंगे। आज ये मंदिर बना रहे हैं क्योंकि ये बीजेपी की यूनिट में हैं, कल को सपा में गए तो साईकल चलाने लगेंगे, परसों बसपा में गए तो मूर्तियां बनवाने लगेंगे। आखिर बिना किसी प्रॉपर आइडियोलॉजी के कोई नेता कैसे बन सकता है? जिसका खुद का कोई विज़न ही नहीं है। ये दावा है कि अलीगढ़ आने वाले तीस साल में कोई ईमानदार नेता नहीं दे पाएगा।

– लेखक गौरव पांडेय पत्रकारिता से जुड़े हैं । अलीगढ़ में उनका छात्रजीवन गुजरा है । गौरव के फेसबुक पेज से साभार…