रवीश को रमन मैग्सेसे सम्मान पत्रकारिता की जनपक्षधरता और उच्चतम मानवीय मूल्यों का सम्मान है !

पत्रकारिता की दुनिया के कई बड़े सम्मानों के बाद रवीश कुमार को प्रतिष्ठित अंतर्राष्ट्रीय रमन मैग्सेसे सम्मान वस्तुतः पत्रकारिता की जनपक्षधरता और उच्चतम मानवीय मूल्यों का सम्मान है। रीढ़विहीन, बिकी हुई और बहुत हद तक वीभत्स पत्रकारिता के इस दौर में रवीश कुमार उन गिनती के पत्रकारों में एक हैं जो तमाम धमकियों और प्रलोभनों के बावजूद सत्ता प्रतिष्ठानों के आगे झुकने की जगह सत्ता की निरंकुशता, सांप्रदायिकता और छल को बेनक़ाब करते रहे। हिंदी मीडिया चैनलों की बेशर्म और अराजक चाटुकारिता के बीच देश के आमजन के सपनों, व्यथाओं और संघर्ष को अभिव्यक्ति देने वाला एन.डी.टी.वी पर उनका एक घंटे का कार्यक्रम ‘प्राइम टाइम’ ताज़ा हवा के झोंके की तरह है जो पत्रकारिता के घुप्प अंधेरे में भी यह अहसास दिलाता है कि अभी सब कुछ ख़त्म नहीं हुआ है। बधाई रवीश जी !

धूप में शजर होना
इश्क़ में शहर होना
आग कुछ बची है इधर
आग तुम उधर होना !

-लेखक ध्रुव गुप्त पूर्व आईपीएस और वरिष्ठ साहित्यकार हैं ।