पद और महत्व न मिलने से मुस्लिम मोदी भक्तों में निराशा, मिशन 2019 पर ग्रहण !

वर्ष 2014 मे जब लोकसभा चुनावों की प्रक्रिया चल रही थी जो देश मे एक एैसा माहौल था कि यदि भाजपा और तत्कालीन गुजरात मुख्यमन्त्री नरेन्द्र मोदी सत्ता में आते है तो एक वर्ग विशेष के साथ न्याय नहीं होगा। विशेषरूप से भारतीय मुस्लिम समाज एक प्रकार से डरा हुआ था कि यदि नरेन्द्र मोदी प्रधानमन्त्री बन गए तो उनके लिए देश मे रहना मुस्किल हो जाएगा। परन्तु ऐसे निराशाजनक माहौल मे भी कुछ मुस्लिम तत्कालीन गुजरात मुख्यमन्त्री नरेन्द्र मोदी के समर्थन मे खुले रूप से आगे आए जिनमे फिल्म लेखक सलीम खान, फिल्म कलाकार सलमान खान, उद्योगपति जफर सरेशवाला और अलीगढ़ के लेखक तथा सामाजिक कार्यक्रर्ता डॉ० जसीम मोहम्मद प्रमुख है। उपरोक्त लोगों ने नरेन्द्र मोदी को प्रधानमन्त्री के रूप मे खुल कर समर्थन दिया हालॉकि उन्हें अपने समाज में न केवल विरोध बल्कि प्रताड़ना का भी शिकार होना पड़ा।

इन लोगों ने नरेन्द्र मोदी को अपना समर्थन उनके प्रधानमन्त्री पद की शपथ लेने के बाद भी जारी रखा। सलीम खान तथा सलमान खान ने कई अवसरों पर प्रधानमन्त्री नरेन्द्र मोदी के समर्थन मे बयान दिया जब कि जफर सरेशवाला ने प्रधानमन्त्री नरेन्द्र मोदी की नीतियों को न केवल टीवी चैनलों पर समर्थन दिया बल्कि उन्होंने विभिन्न नगरों मे शैक्षिक सेमीनार भी आयोजित किए जिसके द्वारा उन्होंने मुसलमानों को सन्देश देने की कोशिश की कि प्रधानमन्त्री नरेन्द्र मोदी की नीतियाँ उनके लिए सकारात्मक है। जफर सरेशवाला को प्रधानमन्त्री नरेन्द्र मोदी ने हैदराबाद स्थित मौलाना आज़ाद नेशनल उर्दू विश्वविद्यालय का कुलाधिपति भी नियुक्त किया । समय के साथ साथ प्रधानमन्त्री नरेन्द्र मोदी की छवि राष्ट्रीय स्तर से उठकर अन्तराष्ट्रीय स्तर पर भी सकारात्मक रूप से विकसित हुई और वे भारतीय राजनीति के शिखर पर खड़े नज़र आने लगे परन्तु उनके मुस्लिम समर्थक हाशिये पर चले गए। उन्हें प्रधानमन्त्री नरेन्द्र मोदी अथवा सरकार की ओर से किसी प्रकार का कोई पद नहीं मिला और न ही अन्य कोई लाभ हुआ। जैसे जैसे प्रधानमन्त्री नरेन्द्र मोदी को कार्यकाल समाप्ति ओर बढ़ता गया वैसे वैसे उनके मुस्लिम समर्थको मे निराशा बढ़ती चली गई। जफर सरेशवाला ने अपने मन की बातों और शिकायतों को खुले रूप से टीवी चैनलों पर भी कहा। उन्होंने एक टीवी साक्षत्कार के दौरान साफ तौर पर कहा कि ‘‘मोदी ने मुझे इस्तेमाल किया’’।

इसी प्रकार अलीगढ़ स्थित लेखक तथा सामाजिक कार्यकर्ता डॉ0 जसीम मोहम्मद ने प्रधानमन्त्री नरेन्द्र मोदी के जीवन एवं कार्यों पर ग्यारह पुस्तकें हिन्दी, उर्दू और अंग्रेजी भाषा मे लिखी। केवल यही नहीं उन्होंने प्रधानमन्त्री नरेन्द्र मोदी की नीतियों तथा योजनाओं पर सेमीनार तथा व्याखान आयोजित किए और उनके द्वारा मुसलमानों को सन्देश दिया दिया कि प्रधानमन्त्री नरेन्द्र मोदी की योजनाये उनके आर्थिक और सामाजिक उत्थान के लिए लाभकारी है। उन्होंने अपने संस्थानो के बल पर नरेन्द्र मोदी स्कॉलरशिप फॉर मुस्लिम स्टुडेन्ट जारी की जिसकी मीडिया मे भी प्रशंसा हुई और मुस्लिम छात्र छात्राये लाभाबन्ति हुए। हाँलाकि डॉ0 जसीम मोहम्मद को प्रधानमनत्री नरेन्द्र मोदी से दो बार भेंट का अवसर प्राप्त है और उन्होंने डॉ0 जसीम मोहम्मद के कार्यों की प्रशंसा भी की परन्तु उन्हें किसी प्रकार का लाभ अथवा पद नहीं मिला। केवल यही नहीं विगत एक वर्ष से डॉ0 जसीम मोहम्मद प्रधानमन्त्री नरेन्द्र मोदी से भेंट करने मे असफल रहे। परन्तु डॉ0 जसीम मोहम्मद का स्वयं इस सम्बन्ध मे कहना है कि, ’’वे प्रधानमन्त्री नरेन्द्र मोदी के साथ जुड़े है और उनका समर्थन करते रहेगें। उन्होंने कहा कि मैंने प्रधानमन्त्री नरेन्द्र मोदी का समर्थन किसी आशा अथवा पद की लालच मे नहीं किया था बल्कि उनकी सबका साथ सबका विकास कटिद्धता के कारण समाज एवं देशहित में किया था। डॉ0 जसीम मोहम्मद ने कहा कि उनका मूल उद्देश्य मुस्लिम समाज तथा प्रधानमन्त्री नरेन्द्र मोदी के बीच एक पुल की भांति कार्य करने का था। डॉ0 जसीम मोहम्मद किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया दे परन्तु ज़मीनी हकीकत यह है कि वे हाशिये पर है और उन्हें किसी प्रकार का लाभ प्रधानमन्त्री नरेन्द्र मोदी अथवा सरकार से नहीं हुआ।

लोक सभा चुनावों की घोषणा हो चुकी है और प्रधानमन्त्री नरेन्द्र मोदी के उक्त समर्थक अन्य दलों का दामन थाम सकते हैं। डॉ0 जसीम मोहम्मद पूर्व मे कांग्रेंस के समर्थक रहे हैं और उन्होंने विभिन्न विधान सभाओं और लोक सभा चुनावों मे सक्रिय रूप से कांग्रेंस के लिए मुसलमानो का समर्थन जुटाया है। वे फिल्म निर्माता महेश भट्ट की काग्रेंस आला हाई कमान से नज़दीकिया जग जाहिर है। वे अलीगढ़ से कार्य करते हैं। यदि डॉ0 जसीम मोहम्मद को काग्रेंस अथवा अन्य दल अपनी ओर आर्कषित करने मे सफल होते हैं तो यह भाजपा के लिए नुक्सान होगा क्योंकि अलीगढ़ को भारतीय मुसलमानों का बौद्धिक केन्द्र माना जाता है।

इस सम्बन्ध में यह ध्यान रखा जाना आवश्यक है कि प्रियंका गान्धी के भारतीय राजनीति पटल पर आने के बाद परिदृष्य बुहत तेजी से बदल रहा है। कहा जाता है कि प्रधानमन्त्री पद का रास्ता उत्तर प्रदेश से होकर जाता है। यदि प्रधानमन्त्री नरेन्द्र मोदी अथवा भाजपा डॉ0 जसीम मोहम्मद जैसे उदारवादी बुद्धिजीवियों को समर्थन खोती है तो कम से कम उत्तर प्रदेश मे उसकी सीटों पर प्रभाव पड़ना तय है। भाजपा विशेषरूप से प्रधानमन्त्री नरेन्द्र मोदी को इस सम्बन्ध मे गहन विचार करना होगा। उदारवादी मुसलमानों का अलग थलग होना न तो भाजपा के लिए लाभकारी है और न ही देश हित में।

लोक सभा चुनावों के परिदृष्य मे यह आवश्यक है कि प्रधानमन्त्री नरेन्द्र मोदी अपने मुस्लिम समर्थको को उनकी हिम्मत बढ़ाने के लिए कुछ सकारात्मक कार्य और पद देने चाहिए ताकि वे मुस्लिम समाज मे निष्ठापूर्वक कार्य कर सके और मुसलमानो के बीच यह सन्देश दे सके कि भाजपा उनके लिए उचित हो या न हो परन्तु प्रधानमन्त्री मोदी की योजनायें उनके लिए लाभकारी है और इसलिए वे अपने हित में भाजपा को अपना समर्थन दें। यदि प्रधानमन्त्री मोदी इस प्रकार का सकारात्मक कदम उठाते है तो भारतीय राजनीतिक मास्टर स्ट्रोक होगा और लोक सभा चुनावों की दशा तथा दिशा बदल जाएगी।