पढ़िए नेताओं को आईना दिखाता ध्रुव गुप्त का आर्टिकल- राजनीति और भाषा की मर्यादा !

देश की राजनीति में भाषा, भंगिमा और गंभीरता का गिरता स्तर गंभीर चिंता का विषय है। नरेंद्र मोदी और अमित शाह सहित भाजपा के ज्यादातर छोटे-बड़े नेता भाषायी दरिद्रता, फूहड़पन और मूर्खता में सबसे आगे हैं। अपने को भावी प्रधानमंत्री के तौर पर देखने वाली ममता बनर्जी और मायावती भी उनसे कुछ कम फूहड़ और अहंकारी नहीं हैं। केजरीवाल, ओवैसी, नीतीश कुमार जैसे लोगों की बातों का अहंकार खींझ पैदा करता है। राहुल गांधी, अखिलेश यादव, प्रियंका गांधी जैसे कुछ लोग अपने भाषणों में थोड़ा मर्यादित तो दिखते हैं, लेकिन उन्हें भी अपना स्तर उठाने की ज़रूरत है। राजनीतिक दलों के प्रवक्ताओं में भाजपा का संवित पात्रा तो सीधा दंगाई दिखता है। दूसरे दलों के ज्यादातर प्रवक्ता भी अपनी भाषा, तेवर और आक्रामकता के कारण मानसिक रोगी ही लगते हैं।

राजनीति में भाषा की गरिमा, विषय का अध्ययन, बातों की गहराई, लहज़े की कोमलता और व्यक्तित्व की विनम्रता कैसी होनी चाहिए, यह हमारे देश के सभी राजनेताओं को ‘स्वराज इंडिया’ के प्रमुख योगेंद्र यादव से सीखने की ज़रूरत है। यह आदमी जब बोलता है तो ऐसा लगता है कि मुंह से हरसिंगार झर रहे हों। उनकी विनम्रता अन्यत्र दुर्लभ है। मुझे आम भारतीय नेताओं को सुनकर जब खींझ होती है तो यूट्यूब पर जाकर कुछ देर योगेंद्र यादव को सुन लेता हूं। सच में मन शांत हो जाता है।

-लेखक ध्रुव गुप्त पूर्व आईपीएस हैं और वरिष्ठ साहित्यकार हैं |