क्या अब हम सब इस ख़ूबसूरत लोकतंत्र को हत्यारों का ख्वाबगाह बनता हुआ देखेंगे ?

गोडसे गांधी का हत्यारा था। उसकी औलादें और उसके पुजारी गांधी को प्रमाणपत्र देकर सूरज पर थूकने की कोशिश कर रहे हैं। गांधी जो थे उनको उसी रूप में दुनिया उनके जीते जी जान चुकी थी।

बर्नाड शॉ ने गांधी की मौत पर कहा, ‘यह दिखाता है कि अच्छा होना कितना ख़तरनाक होता है.’ दक्षिण अफ़्रीका से गांधी के धुर विरोधी फ़ील्ड मार्शल जैन स्मट्स ने कहा, ‘हमारे बीच का राजकुमार नहीं रहा.’ किंग जॉर्ज षष्टम ने संदेश भेजा,’गांधी की मौत से भारत ही नहीं संपूर्ण मानवता का नुक़सान हुआ है.’

सबसे भावुक संदेश पाकिस्तान से मियां इफ़्तिखारुद्दीन की तरफ़ से आया, ‘पिछले महीनों, हममें से हर एक जिसने मासूम मर्दों, औरतों और बच्चों के ख़िलाफ़ अपने हाथ उठाए हैं या ऐसी हरकत का समर्थन किया है, गांधी की मौत का हिस्सेदार है.’

आज सत्तर साल बाद गांधी का पुतला बनाकर फिर से गांधी को गोली मारी गई और ‘महात्मा गोडसे ज़िंदाबाद’ का नारा लगाया गया। क्या हिन्दू महासभा जैसे निकृष्ट संगठन के प्रयास से गांधी निम्न और गोडसे महान हो जाएंगे? क्या अब हम सब इस ख़ूबसूरत लोकतंत्र को हत्यारों का ख्वाबगाह बनता हुआ देखेंगे? मेरा विश्वास है कि ऐसा कभी नहीं होगा । भारत की जनता का विवेक ऐसा नहीं है कि वह हत्यारे और महात्मा का फर्क न समझती हो !

-पत्रकार कृष्णकांत के फेसबुक वॉल से ।