Father’s डे : जन्मदाता हैं जो, नाम जिनसे मिला, थामकर जिनकी उंगली है बचपन चला

माँ हमे जन्म देती है तो पिता एक ढाल की भांति हमें हर कष्ट से बचाता है जैसे एक पेड़ अपनी छाया में आये सभी पथिकों को शरण देता है और उन्हें शीतल छाया प्रदान करता है और सभी आने वाले संकट को अपने ऊपर ले लेता है ठीक उसी तरह एक पिता भी जीवन में हर क्षण यही सोचता है कि वह अपने बच्चों को किस प्रकार एक सुनहरा और अपने से अच्छा भविष्य दे और इस को पूरा करते करते वह अपना जीवन इसी में लगा देता है और अपनी बहुत सी इच्छाओं को मारकर स्वयं से पहले अपने बच्चों के बारे में सोचता है। यहाँ तक कि अपने कष्टों और अपनी आवश्यकताओं को पीछे रख केवल अपने बच्चों के भविष्य को उज्ज्वल बनाने के लिए ही दिन रात प्रयत्नशील रहता है।

मेरे अनुसार एक अच्छा पिता वह नहीं है जो अपने बच्चों की हर ज़िद्द को पूरा करता है ये सोच कर कि अभी वे बच्चे हैं बल्कि एक आदर्श पिता वह है जो अपने बच्चों को सही और गलत में अंतर करना सिखाए और बच्चों की अनुचित मांगें न मानकर बच्चों को जीवन का महत्त्व समझाए। इस प्रकार पिता बच्चों को व्यवहारिकता और अनुभव उपहार में देता है। माँ के जन्म देने के बाद पिता के नाम से ही समाज में हमारी पहचान होती है, वही हमें समाज के हर पहलू और रूप से अवगत कराते हैं और एक गुरु बनकर अपने अनुभव की किताब से जीवन के पाठ सिखाते हैं। जैसे एक माँ के बिना बच्चे का कोई अस्तित्व नहीं ठीक वैसे ही पिता के बिना समाज में बच्चे की कोई पहचान नहीं।

मै पूरे गर्व के साथ अपने पापा के बारे में बोल सकती हूँ कि उन्होंने मुझे पढ़ाने से लेकर साइकिल चलाना तक सिखाया है, बचपन में जब कभी मैं गिनती या पहाड़े भूल जाती तो पिटाई भी खाई है और मुझे रोता देखकर पापा खुद रोने लगते। हम पापा को परेशान करते, मनमानियां करते और बाद में फिर डांट खा कर पर मुंह फुला लेते फिर खुद पापा हमारी मनपसंद चीज़ लाकर हमें मनाते। हम किसी भी क्षेत्र में कम न रह जायें इसके लिए पापा से जितना प्रयास हो सका, उतना उन्होंने किया है, फिर चाहे बात पढ़ाई की हो, खेलने की हो या फिर कला की हो। पापा ने हमें हर संकट का सामना करने का साहस दिया है और मुझे आत्मनिर्भर बनाया और अपने शहर से बाहर निकल कर अपने पैरों पर खड़ा होने के योग्य बनाया। आज अगर उन्हें हम पर गर्व है तो इस बात का पूरा श्रेय उन्हीं को जाता है। चाहे बात घर से बाहर निकल कर जॉब करने की हो या पहली बार चाय बनाना सिखाना हो, उन्होंने हर क्षेत्र में मेरा साथ दिया है। माँ ने हमें जन्म दिया, तो पिता ने एक पेड़ की भाँति हमें हर मुसीबत से बचाया है।

आज भी जब कभी खुद को निराशा से घिरा पाती हूँ तो माँ पापा की बातें मुझे प्रेरित करती हैं और उत्साह देती हैं। जितना विश्वास मुझे खुद पर है उससे कई गुना मेरे पापा को मुझ पर है कि मैं अपने काम और मेहनत से हमेशा अपने पापा का नाम रौशन करती रहूंगी। मेरे पापा ने कभी बेटा बेटी में कोई अन्तर नहीं किया उनके लिये दोनों समान हैं, बल्कि कई बार मेरा भाई इसी बात को लेकर पापा से लड़ पड़ता है कि आप अपनी बेटियों को ज़्यादा प्रेम करते हो। पापा ने हमेशा एक दोस्त बनकर हमारा साथ दिया है और जरूरत पड़ने पर समझाया भी है। मेरी सबसे बड़ी प्रेरणा मेरे पापा ही हैं क्योंकि उन्होंने अपने मेजर एक्सीडेंट के बाद भी मेहनत और हिम्मत नहीं छोड़ी तो मेरे लिए इससे बड़ी प्रेरणा और क्या हो सकती है। उन्होंने हमेशा यही सिखाया है कि मेहनत और अपने आप पर विश्वास रखो। हम कितने ही बड़े क्यों ना हो जायें उनके लिए हमेशा बच्चे ही रहेंगे। मेरे लिए मेरे पापा दुनिया के सबसे अच्छे पापा हैं।