लोकसभा चुनाव : किसकी मुट्ठी लाख की, किसकी मुट्ठी खाक की, देशभर की निगाहें, फैसला होगा कल-

शुभम अग्रवाल/ नई दिल्ली । लोकसभा चुनाव 2019 में कौन जीता और कौन हारा इससे परदा उठेगा और फिर से एक बार इतिहास के पन्नो पर नाम अंकित हो जाएगा । लेकिन नतीजों की सुबह तक पहुंचने के लिए अभी रात से गुज़रना है। रात गहरी हो रही है और नेताओं की नींद उड़ी है ।सुबह क्या फ़ैसला आएगा ये जानने की बेचैनी से आंखों से नींद गायब है। क्योंकि जनता की माने तो “आज की रात इन्हें नींद नही आएगी सुना है इनकी महफ़िल में रतजगा है।”

लोकसभा चुनाव में किसके दावे पुरज़ोर और किसके दावे कमज़ोर हैं, इसकी असलियत वोटिंग मशीन के सुपुर्द है। चंद घंटों बाद सुबह का सूरज उगेगा और नतीजों की बारिश होगी। ये सोने की नहीं जागने की रात है। ये खामोश लबों से सत्ता के आने या चले जाने की भविष्यवाणी की रात है। ये कयासों की रात है वो कयास जो एग्जिट पोल ने लगाए। राहुल गांधी व विपक्ष में खड़े सभी दलों की रणनीति और मेहनत इस बार असरदार रही या नहीं इसका निर्णय कल होगा।

नतीजों को लेकर नेताओं की नींद गायब –
सबका सब-कुछ दांव पर लगा है। गुजरात और नरेंद्र मोदी का पर्याय सच होगा या नहीं। जिस गुजरात के दम पर नरेंद्र मोदी प्रधानमंत्री बने, वो दम भी कायम है या नहीं ? अमित शाह के जिस संगठन और रणनीतियों के सहारे बीजेपी दो-तिहाई हिंदुस्तान पर काबिज हुई…..वो अपने घर में ही कमाल करेगी या नहीं ?

और सबसे अहम ये राहुल गांधी की अग्नि-परीक्षा की रात है। भला कौन होगा जो हार से अध्यक्ष की पारी की शुरुआत करना चाहेगा। कौन नहीं होगा जो जीत से खाता खोलना चाहेगा लेकिन चाहने से क्या होगा वही होगा जो देश की जनता जनार्दन को मंज़ूर होगा लिहाज़ा ये रात सबके लिए रतजगा की रात है। खेल बनने-बिगड़ने की आशंका से फैसले की रात बीजेपी को भी रतजगा करा रही है।
परीक्षा की रात गठबंधन की तिकड़ी के लिए भी है। इस बार चुनावी परिणाम रोचक हैं अन्य दलों से दलबदलू रूपधारी मुख्य रह चुके सियासी स्टार बनकर सत्ता सुख हासिल करेंगे या सियासत के पहले ही दंगल में टांय-टांय फिस्स हो जाएंगे…..इसी उधेड़बुन वाली रात है इनकी…..यह कमोवेश परिस्थिति जीवन में आती ही है क्योंकि समय कम और चिन्ता ज्यादा नींद उड़ा ही देती हैं और जब चिंता भी अपनी आन-बान के साथ देश की शान की हो।

-लेखक व्यवस्था दर्पण बुलंदशहर के ब्यूरो चीफ हैं ।