अलीगढ़ लोकसभा : BJP और महागठबंधन को कांग्रेस की कड़ी चुनौती, मुस्लिमो पर टिका जीत का फैसला, दीपक चौधरी से BSP चिंतित

विश्व मे तहजीब, तालीम और ताले के लिए विख्यात अलीगढ़ लोकसभा का चुनाव भी त्रिकोणीय हो गया है । पहली लोकसभा चुनाव में तीन-तीन जाट उम्मीदवार मैदान में हैं । भाजपा ने सांसद सतीश गौतम को एक बार फिर टिकट देकर मैदान में उतारा है । सतीश गौतम अपने विवादित बयानों से पिछले पांच साल चर्चाओं में रहे हैं । राजा महेंद्र प्रताप की जयंती से लेकर  जिन्ना, आतंकवाद और मुस्लिम के जरिये उन्होंने अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी पर जमकर तीर चलाये हैं । अमुवि लाइब्रेरी में जिन्ना की तस्वीर हटाने के मामले ने तो देश ही नही दुनियाभर में सुर्खियां बटोरी थीं । सतीश गौतम के पत्र लिखने के बाद कैंपस में छात्रों और पुलिस में टकराव हुआ और कई दिन तक हंगामा चलता रहा । सतीश गौतम अपने बयानों के जरिये सुर्खियों में रहे । हालांकि 2014 में बाबू जी वर्तमान में राजस्थान के राज्यपाल कल्याण सिंह के आशीर्वाद से वह संसद पहुंचे लेकिन बीच मे राजपैलेस से टकराव की खबरे भी रही । सूत्र तो यह भी कहते हैं कि सतीश गौतम को 2019 में राजपैलेस टिकट नही देना चाहता था लेकिन भाजपा ने उम्मीदवार बना दिया । राजपैलेस पर धरना-प्रदर्शन, हंगामा भी हुआ लेकिन टिकट नही कट सका। चुनाव प्रचार में गांवों में उनके विरोध की खबरे आम हो रही हैं, लेकिन फिर भी पीएम मोदी के चेहरे पर चुनाव के कारण वो मजबूत स्थिति में हैं ।

सपा-बसपा और रालोद के यूपी में महागठबंधन से बसपा ने अलीगढ़ पर अजीत बालियान को टिकट दिया है । अजीत बालियान को टिकट मिलने से पहले तक शायद ही कोई जानता था, बसपा ने उन्हें उम्मीदवार बनाया है । जाट, जाटव , मुस्लिम और यादव वोटों को परंपरागत मान कर चल रहे महागठबंधन को इन्ही वोटों से जीत की आस है । हालांकि प्रत्याशी की घोषणा से लेकर नामांकन तक अजीत बालियान कोई खास भीड़ नही जुटा सके लेकिन तीन तीन पार्टियों के संगठन के दम पर वह ताल ठोक रहे हैं । बाहरी और गैर राजनैतिक होने के कारण बसपा, सपा में उनका अंदरूनी विरोध भी है लेकिन खुलकर नेता कुछ नही बोल पा रहे है । अलीगढ़ मे मुस्लिम मतों की संख्या बहुत ज्यादा होने के कारण महागठबंधन को यहीं से आस है । 

वहीं राहुल गांधी और प्रियंका के तेवरों से उत्साहित कांग्रेस से जिले की राजनीति के दिग्गज नेता और पूर्व सांसद चौ बिजेंद्र सिंह मैदान में हैं । टीम राहुल ने चौ बिजेंद्र सिंह पर भरोसा जताया है । अलीगढ़ में कांग्रेस प्रत्याशी पिछले कई वर्षों से 2019 चुनाव की तैयारी कर रहे थे, जिसका फायदा भी उन्हें मिला । केंद्र में भाजपा के खिलाफ माहौल और मुस्लिम मतों का कांग्रेस की ओर झुकाब ने उन्हें भाजपा से लड़ाई में ला दिया है ।  कांग्रेस में हाल ही में शामिल हुए पूर्व विधायक जमीरउल्लाह खान के आने से कांग्रेस की स्थिति बहुत मजबूत हुई हैं। जाट समुदाय में भी बिजेंद्र सिंह की अच्छी और प्रभावी पकड़ है, वहीँ मुस्लिम, यादव, ठाकुर, ब्राह्मण और लोध राजपूत बिरादरी का झुकाब भी उनके साथ है । अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी के छात्रों और शिक्षकों की बड़ी लॉबी भी कांग्रेस के लिए लामबंद है । किसानो को कर्जमाफी का वायदा, गरीबो को 72 हजार रुपए देने का वायदा भी गांव-देहात में कांग्रेस के पक्ष में है । मुस्लिम हो या दलित सभी के लिए खुलकर आवाज़ उठाने के कारण जनता चौ बिजेंद्र सिंह के साथ है । 

वहीं इन तीनो के अलावा शिवपाल यादव की पार्टी प्रगतिशील समाजवादी पार्टी लोहिया से पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष तेजवीर सिंह गुड्डू के पुत्र दीपक चौधरी भी चुनावी रण में हैं । मुस्लिमो, यादवो और जाट समुदाय के साथ साथ प्रत्येक वर्ग में उनकी पकड़ ने महागठबंधन और कांग्रेस को परेशानी में डाल दिया हैं। दीपक चौधरी सबसे युवा प्रत्याशी हैं और युवाओं में उनका क्रेज है।  युवाओं में उनके मुद्दे वायरल हो रहे हैं । शिवपाल यादव की आलमपुर चौराहे पर हुई जनसभा में उमड़े सैलाब ने महागठबंधन को चिंतित कर दिया है ।

बताते चलें कि अलीगढ़ में 18 अप्रेल को मतदान होना है जिसके लिए चुनावी अभियान चरम पर है । जनता को तय करना है कि वह किसे वोट करती है लेकिन इतना जरूर है कि मुस्लिम वोटों का रुझान जीत के आँकड़े तय करेगा । राजनैतिक विश्लेषक विपिन चौधरी कहते हैं कि मुस्लिम समुदाय के वोट बंटे तो सतीश गौतम फिर सांसद होंगें अन्यथा जिस ओर मुस्लिम एकतरफा वोट करेगा वही प्रत्याशी अलीगढ़ से संसद जाएगा ।