बाप आजम खान पर FIR दर्ज होते ही बेटे अब्दुल्लाह को याद आया Aligarh एनकाउंटर !

लखनऊ । सियासत भी अजब गुल खिलाती है, यहां कौन, कब, कैसे नेताओं को याद आयेगा परिस्थितियों पर निर्भर करता है । अब आप सपा के बड़े नेताओं में शुमार, मुस्लिमो के बड़े नेता कहे जाने वाले आज़म खान के परिवार को ही देख लीजिए ,जैसे ही लखनऊ में आज़म खान के खिलाफ 2016 में डॉ आंबेडकर के खिलाफ अभद्र टिप्पणी करने का मामला दर्ज हुआ उनका परिवार आक्रोशित हो उठा । खुद आजम खान ने तो योगी सरकार और भाजपा पर निशाना साधा ही उनके बेटे विधायक अब्दुल्लाह आजम ने भी भाजपा पर हमला बोल दिया । मुस्लिमो के मुद्दे पर अक्सर चुप्पी साधने वाले आजम परिवार के वारिस ने मुस्लिमो को आधार बनाकर योगी सरकार पर निशाना साधा । या यूँ कहें कि बाप आज़म खान पर जैसे ही FIR हुई तो बेटे अब्दुल्लाह आजम को अलीगढ़ एनकाउंटर याद आ गया यानि मुसलमान याद आ गए ।

दरअसल दलितों ने आजम खान के खिलाफ लखनऊ में 2016 में गाजियाबाद में डॉ आंबेडकर को लेकर टिप्पणी की थी लेकिन सत्ता में सपा के होने के चलते मामला रफा दफा हो गया था । अब भाजपा की सरकार में यह मामला फिर उठ गया है । दलितों ने लखनऊ में रिपोर्ट दर्ज कराई है ।

यह ट्वीट किया आजम के बेटे अब्दुल्लाह ने –
“बड़े अौर छोटे बादशाह क्यों मुक़दमो का सहारा ले रहे हो हिम्मत करो अौर एक परिवार का रामपुर मे एनकाउंटर करा दो ।
कौन रोकता है आपको अलीगढ़ मे कौन रोक पाया बाकी यू पी कोन रोक पाया आपको ?
पुलिस आपकी अधिकारी आपके सब आपका
अपनी विचारधारा के अौर बड़े नेता बन जाओगे इतिहास याद करेगा आपको ।”

अब्दुल्लाह आजम के ट्वीट से हालांकि मुस्लिम समुदाय में कोई खास प्रतिक्रिया नही है लेकिन अलीगढ़ में यह सवाल जरूर है कि जब अलीगढ़ एनकाउंटर में दो मुस्लिम युवक मारे गए तो आजम खान और उनके बेटे अब्दुल्लाह आजम कहां थे ? अब्दुल्लाह आजम ने क्यों अलीगढ़ आने तक कि जहमत नही उठाई ? सवाल यह भी है कि जब अमुवि के छात्र नेताओं पर पुलिस ने अपहरण की रिपोर्ट दर्ज की तो कहां थे अब्दुल्लाह और आजम खान ? इन सभी सवालों के जवाब तो आजम परिवार ही दे सकता है लेकिन इतना जरूर है कि मुस्लिमो की याद इस परिवार को तभी आती है जब या तो वोट की जरूरत हो या फिर खुद पर कोई आंच आये ।